भारतीय वित्तीय परिदृश्य को एक नया आकार देते हुए, फरवरी में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2025 ने देश के वेतनभोगी मध्यम वर्ग के लिए राहत के एक नए युग की शुरुआत की है। इस बजट की सबसे बड़ी घोषणा—”12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं”—कार्यालयों और घरों में चर्चा का मुख्य विषय बन गई है। जैसे-जैसे वित्तीय वर्ष 2025-26 आगे बढ़ रहा है, करदाता अब इस बात का बारीकी से हिसाब लगा रहे हैं कि 2026 में अपना रिटर्न दाखिल करते समय इन संरचनात्मक परिवर्तनों का उनके ‘इन-हैंड’ वेतन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
जहाँ 12 लाख रुपये की सीमा कार्यबल के एक बड़े वर्ग को पूर्ण कर मुक्ति प्रदान करती है, वहीं नई कर व्यवस्था का “क्लिफ इफेक्ट” (cliff effect) यह है कि इस सीमा से थोड़ा भी ऊपर कमाने वालों के लिए गणित पूरी तरह बदल जाता है। यह लेख नए स्लैब, धारा 87A की कार्यप्रणाली और उच्च आय वर्ग के लिए कर देनदारी का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करता है।
नई व्यवस्था की ओर झुकाव
वर्षों से, भारतीय करदाता अपनी वित्तीय योजनाओं को ‘पुरानी कर व्यवस्था’ (जिसमें 80C, HRA और होम लोन जैसे विभिन्न कटौती के लाभ मिलते थे) और ‘नई कर व्यवस्था’ (जिसमें दरें कम थीं लेकिन छूट नहीं थी) के बीच संतुलित करते थे। बजट 2025 में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार की प्राथमिकता एक सरल, छूट-मुक्त प्रणाली है।
छूट (Rebate) की सीमा बढ़ाकर, सरकार ने प्रभावी रूप से नई कर व्यवस्था को अधिकांश वेतनभोगी पेशेवरों के लिए सबसे आकर्षक विकल्प बना दिया है। इस रणनीति का उद्देश्य नागरिकों के हाथों में अधिक खर्च करने योग्य आय (Disposable Income) देना है, जिससे घरेलू खपत को बढ़ावा मिल सके।
नए टैक्स स्लैब को समझना (2025-26)
सरकार ने कर श्रेणियों को इस तरह से पुनर्गठित किया है कि कर का बोझ धीरे-धीरे बढ़े। नई संरचना इस प्रकार है:
| आय सीमा | टैक्स दर |
| ₹0 से ₹4 लाख | 0% |
| ₹4 लाख से ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 लाख से ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 लाख से ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 लाख से ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 लाख से ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
₹12 लाख तक ‘जीरो टैक्स’ का गणित
करदाताओं के बीच भ्रम का एक सामान्य बिंदु यह है कि यदि 12 लाख रुपये तक की आय कर-मुक्त है, तो स्लैब 4 लाख रुपये से क्यों शुरू होते हैं। इसका उत्तर आयकर अधिनियम की धारा 87A में छिपा है।
नए नियमों के तहत, यदि आपकी कुल कर योग्य आय (मानक कटौती के बाद) 12 लाख रुपये से अधिक नहीं है, तो आप पूर्ण कर छूट (Rebate) के पात्र हैं। मूल रूप से, स्लैब के आधार पर गणना किए गए कर को सरकार द्वारा शून्य कर दिया जाता है। हालाँकि, जैसे ही आपकी आय 12 लाख रुपये से एक रुपया भी ऊपर जाती है, आप इस “पूर्ण छूट” का लाभ खो देते हैं। आपको पहले 4 लाख रुपये पर तो छूट मिलती है, लेकिन उसके बाद के हर रुपये पर आपको 5%, 10% और 15% के ब्रैकेट के अनुसार कर देना होता है।
उच्च वेतन के लिए विस्तृत टैक्स गणना
वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए, हमें 15 लाख से 25 लाख रुपये के ब्रैकेट में आने वाले करदाताओं को देखना होगा। सभी वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए, सकल वेतन से ₹75,000 की मानक कटौती (Standard Deduction) स्वचालित रूप से घटा दी जाती है।
1. ₹15 लाख की वार्षिक आय पर:
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कर योग्य आय: ₹14,25,000 (₹75,000 की कटौती के बाद)
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₹0–4 लाख: शून्य
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₹4–8 लाख (5%): ₹20,000
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₹8–12 लाख (10%): ₹40,000
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₹12–14.25 लाख (15%): ₹33,750
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कुल टैक्स: ₹93,750
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सेस (4%): ₹3,750
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कुल कर देनदारी: ₹97,500
2. ₹20 लाख की वार्षिक आय पर:
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कर योग्य आय: ₹19,25,000
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₹0–4 लाख: शून्य
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₹4–8 लाख (5%): ₹20,000
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₹8–12 लाख (10%): ₹40,000
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₹12–16 लाख (15%): ₹60,000
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₹16–19.25 लाख (20%): ₹65,000
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कुल टैक्स: ₹1,85,000
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सेस (4%): ₹7,400
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कुल कर देनदारी: ₹1,92,400
3. ₹25 लाख की वार्षिक आय पर:
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कर योग्य आय: ₹24,25,000
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₹0–4 लाख: शून्य
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₹4–8 लाख: ₹20,000
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₹8–12 लाख: ₹40,000
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₹12–16 लाख: ₹60,000
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₹16–20 लाख: ₹80,000
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₹20–24 लाख (25%): ₹1,00,000
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₹24–24.25 लाख (30%): ₹7,500
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कुल टैक्स: ₹3,07,500
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सेस (4%): ₹12,300
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कुल कर देनदारी: ₹3,19,800
निष्कर्ष
नई संरचना पिछले वर्षों की तुलना में महत्वपूर्ण बचत प्रदान करती है। उदाहरण के लिए, 15 लाख रुपये कमाने वाला व्यक्ति अब 1 लाख रुपये से भी कम कर देता है, जो पुरानी व्यवस्थाओं के तहत बीमा या हाउसिंग लोन में भारी निवेश के बिना अकल्पनीय था।
मध्यम वर्ग के लिए, 2025 का बजट केवल कम कर देने के बारे में नहीं है; यह विशिष्ट कर-बचत साधनों में निवेश के लिए मजबूर हुए बिना अपने पैसे का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता के बारे में है।












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