धामी सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए आज एक जुलाई 2026 से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत कर दी है। इसके साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में राज्य के सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को समान अवसर दिए जाएंगे। जिन वर्गों को पहले पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, उन्हें भी अब शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है। राज्य सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास, कौशल विकास, स्टार्टअप और आधुनिक प्रशिक्षण को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि युवा भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार हो सकें।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण सिर्फ मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का भी माध्यम बनेगा। मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों, धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों और समाज के प्रबुद्ध लोगों से इस नई व्यवस्था को सफल बनाने में सहयोग की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह प्राधिकरण हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उत्तराखंड को समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा।